आप इतने वृद्ध कभी नहीं हो सकते कि एक नया लक्ष्य निर्धारित न कर सकें या नया सपना ना देख सकें.
Wednesday, 23 September 2015
Monday, 8 June 2015
ek pagli ladki-kumar vishwas
अमावस की काली रातों में, जब दिल का दरवाजा खुलता है ,
जब दर्द की प्याली रातों में, गम आंसूं के संग होते हैं ,
जब पिछवाड़े के कमरे में , हम निपट अकेले होते हैं ,
जब घड़ियाँ टिक -टिक चलती हैं , सब सोते हैं , हम रोते हैं ,
जब बार बार दोहराने से , सारी यादें चुक जाती हैं ,
जब उंच -नीच समझाने में , माथे की नस दुःख जाती हैं ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भरी लगता है .
जब पोथे खाली होते हैं , जब लोग सवाली होते हैं ,
जब ग़ज़लें रास नहीं आतीं , अफसाने गाली होते हैं .
जब बासी फीकी धुप समेटें , दिन जल्दी ढल जाता है ,
जब सूरज का लश्कर , छत से गलियों में देर से जाता है ,
जब जल्दी घर जाने की इच्छा , मन ही मन घुट जाती है ,
जब कॉलेज से घर लाने वाली , पहली बस छुट जाती है ,
जब बेमन से खाना खाने पर , माँ गुस्सा हो जाती है ,
जब लाख मन करने पर भी , पारो पढने आ जाती है ,
जब अपना हर मनचाहा काम कोई लाचारी लगता है ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है
जब कमरे में सन्नाटे की आवाज सुनाई देती है ,
जब दर्पण में आँखों के नीचे झाई दिखाई देती है ,
जब बड़की भाभी कहती हैं , कुछ सेहत का भी ध्यान करो ,
क्या लिखते हो दिनभर , कुछ सपनों का भी सम्मान करो ,
जब बाबा वाली बैठक में कुछ रिश्ते वाले आते हैं ,
जब बाबा हमें बुलाते हैं , हम जाते हैं , घबराते हैं ,
जब साड़ी पहने एक लड़की का, एक फोटो लाया जाता है ,
जब भाभी हमें मनाती हैं , फोटो दिखलाया जाता है ,
जब सारे घर का समझाना हमको फनकारी लगता है ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है
दीदी कहती हैं उस पगली लड़की की कुछ औकात नहीं ,
उसके दिल में भैया , तेरे जैसे प्यारे जज्बात नहीं ,
वो पगली लड़की नौ दिन मेरे लिए भूखी रहती है ,
छुप -छुप सारे व्रत करती है , पर मुझसे कभी ना कहती है ,
जो पगली लड़की कहती है , मैं प्यार तुम्ही से करती हूँ ,
लेकिन मै हूँ मजबूर बहुत , अम्मा -बाबा से डरती हूँ ,
उस पगली लड़की पर अपना कुछ अधिकार नहीं बाबा ,
ये कथा -कहानी किस्से हैं , कुछ भी तो सार नहीं बाबा ,
बस उस पगली लड़की के संग जीना फुलवारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है .
जब दर्द की प्याली रातों में, गम आंसूं के संग होते हैं ,
जब पिछवाड़े के कमरे में , हम निपट अकेले होते हैं ,
जब घड़ियाँ टिक -टिक चलती हैं , सब सोते हैं , हम रोते हैं ,
जब बार बार दोहराने से , सारी यादें चुक जाती हैं ,
जब उंच -नीच समझाने में , माथे की नस दुःख जाती हैं ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भरी लगता है .
जब पोथे खाली होते हैं , जब लोग सवाली होते हैं ,
जब ग़ज़लें रास नहीं आतीं , अफसाने गाली होते हैं .
जब बासी फीकी धुप समेटें , दिन जल्दी ढल जाता है ,
जब सूरज का लश्कर , छत से गलियों में देर से जाता है ,
जब जल्दी घर जाने की इच्छा , मन ही मन घुट जाती है ,
जब कॉलेज से घर लाने वाली , पहली बस छुट जाती है ,
जब बेमन से खाना खाने पर , माँ गुस्सा हो जाती है ,
जब लाख मन करने पर भी , पारो पढने आ जाती है ,
जब अपना हर मनचाहा काम कोई लाचारी लगता है ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है
जब कमरे में सन्नाटे की आवाज सुनाई देती है ,
जब दर्पण में आँखों के नीचे झाई दिखाई देती है ,
जब बड़की भाभी कहती हैं , कुछ सेहत का भी ध्यान करो ,
क्या लिखते हो दिनभर , कुछ सपनों का भी सम्मान करो ,
जब बाबा वाली बैठक में कुछ रिश्ते वाले आते हैं ,
जब बाबा हमें बुलाते हैं , हम जाते हैं , घबराते हैं ,
जब साड़ी पहने एक लड़की का, एक फोटो लाया जाता है ,
जब भाभी हमें मनाती हैं , फोटो दिखलाया जाता है ,
जब सारे घर का समझाना हमको फनकारी लगता है ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है
दीदी कहती हैं उस पगली लड़की की कुछ औकात नहीं ,
उसके दिल में भैया , तेरे जैसे प्यारे जज्बात नहीं ,
वो पगली लड़की नौ दिन मेरे लिए भूखी रहती है ,
छुप -छुप सारे व्रत करती है , पर मुझसे कभी ना कहती है ,
जो पगली लड़की कहती है , मैं प्यार तुम्ही से करती हूँ ,
लेकिन मै हूँ मजबूर बहुत , अम्मा -बाबा से डरती हूँ ,
उस पगली लड़की पर अपना कुछ अधिकार नहीं बाबा ,
ये कथा -कहानी किस्से हैं , कुछ भी तो सार नहीं बाबा ,
बस उस पगली लड़की के संग जीना फुलवारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है .
nazam
हर एक खोने हर एक पाने में तेरी याद आती है
नमक आँखों में घुल जाने में तेरी याद आती है
------
कोई कब तक महज़ सोचे कोई कब तक महज़ गाये
इलाही क्या ये मुमकिन है कि कुछ ऐसा भी हो जाये
मेरा महताब उसकी रात के आग़ोश में पिघले
मैं उसकी नींद में जागूं वो मुझमे घुल के सो जाये
मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हें बतला रहा हूं मैं
कोई लब छू गया था तब कि अबतक गा रहा हूं मैं
---------
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है
नमक आँखों में घुल जाने में तेरी याद आती है
------
कोई कब तक महज़ सोचे कोई कब तक महज़ गाये
इलाही क्या ये मुमकिन है कि कुछ ऐसा भी हो जाये
मेरा महताब उसकी रात के आग़ोश में पिघले
मैं उसकी नींद में जागूं वो मुझमे घुल के सो जाये
मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हें बतला रहा हूं मैं
कोई लब छू गया था तब कि अबतक गा रहा हूं मैं
---------
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है
Written by Dr. Kumar Vishwas
Posted by :Ravi Jha
Wednesday, 12 March 2014
Friday, 27 December 2013
Something about yOU aNd mE
Tm bhi tanha the hm bhi tanha the, mil ke rone lge
Ek jaise the dono ke gum, dawa hone lge
Tujme muskurate hai, tujme gungunate hai
Khud ko tere pas hi chod aate hai
Tere hi khyalo me dube dube jate hai
Khud ko tere pas hi chhod aate hai
Do raz milte hai hmraj bante hai
Sannate aise hi awaz bante hai
Khamoshi me teri meri sadaye hai
Meri hatheli me teri duaye hai
Ik sath tera ho to so manjile ho
Tanhayi teri meri mahfile ho
Hm teri nigaho se khud me jhilmilate hai
Khud ko tere pas hi chhod aate hai
Tujhse apni rato ko subah banate hai
Khud ko tere pas hi chhod aate hai
Ek jaise the dono ke gum, dawa hone lge
Tujme muskurate hai, tujme gungunate hai
Khud ko tere pas hi chod aate hai
Tere hi khyalo me dube dube jate hai
Khud ko tere pas hi chhod aate hai
Thode bhare hai hm thode se khali hai
Tm bhi ho uljhe se hm bhi sawali hai
Kuch tm bhi kore ho kuch hm bhi sare hai
Ek aasma par hm do chand aadhe hai
Kam hai jami bhi thodi kam aasma hai
Lagta adhura tm bin har jaga
Apni har kami me hm ab tujhe hi pate hai
Khud ko tere pas hi chhod aate hai
Jitni ye virani hai tujhse hi sajate hai
Khud ko tere pas hi chhod aate hai
Do raz milte hai hmraj bante hai
Sannate aise hi awaz bante hai
Khamoshi me teri meri sadaye hai
Meri hatheli me teri duaye hai
Ik sath tera ho to so manjile ho
Tanhayi teri meri mahfile ho
Hm teri nigaho se khud me jhilmilate hai
Khud ko tere pas hi chhod aate hai
Tujhse apni rato ko subah banate hai
Khud ko tere pas hi chhod aate hai
Must Read :- Yaad rkhne yogya baate , Mana Ke Dil he.. , Kya Me Shayar Hota Ja Rha Hu
Sunday, 17 March 2013
Yaad rkhne yogya baaten
- हमारी उम्र नहीं हमारे विचार और कार्य हमें बड़ा बनाते हैं.
- कभी-कभी जिंदगी में सबसे आसान सवाल ही जवाब देने में सबसे मुश्किल लगने लगता है.
- हमारी उम्र नहीं हमारे विचार और कार्य हमें बड़ा बनाते हैं.
- लड़कियों के लिए जीवन आसान नहीं यहाँ तक की फेसबुक पर भी.
- लोग दूसरों के जीवन में इतनी रूचि क्यों लेते हैं? लगता है उनका स्वयं का जीवन दिलचस्प नहीं है.
- हमें जीवन में भले ही हार का सामना करना पड़ जाये पर जीवन से कभी नहीं हारना चाहिए
- Read More Blog :-http://loveislaststageoflife.blogspot.in/2013/03/yaad-rkhne-yogya-baaten.html
Mana Ke Dil he..
Baat Adhuri . ...................
Kya Me Shayar Hota Ja Rha Hu
Without your love, I would die...........................................................................
A Girl and a Boy
Mera Pyaara Sheher
Yaad Hoga Tumhe Ye Geet
Sochta Hu.........
Kya Krein......
Yeh kaisi meethi uljhan hai ?
Kuchh kaho na !
Kuch Kaho Na
What Is Love ?
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